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How did Dr. Bhimrao Ambedkar propose to a girl born in a Brahmin family?

ब्राह्मण परिवार में जन्मी लड़की को डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने किस तरह किया था प्रपोज?

स्टोरी शुरू होती है डॉ. भीमराव अम्बेडकर की पहली पत्नी रमाबाई से, जिनके निधन के बाद तकरीबन 8 वर्षों तक बाबा साहब को जीवनसाथी के बगैर अपनी जिन्दगी गुजारनी पड़ी। इसी बीच डॉ. अम्बेडकर को मधुमेह, उच्च रक्तचाप तथा पैरों में न्यूरोपैथिक दर्द जैसी बीमारियों ने घेर लिया था। ऐसे में वह अपने गिरते स्वास्थ्य को लेकर चिन्तित रहने लगे थे।

लोकवाङ्गमय गृह प्रकाशन, मुम्बई से प्रकाशित किताब ‘डॉ. बाबा साहेब’ के मुताबिक, “पत्नी रमाबाई की मृत्यु के पश्चात भीमराव अम्बेडकर ने शादी नहीं करने का निर्णय लिया था, लेकिन खुद के गिरते स्वास्थ्य के कारण उन्होंने अपना निर्णय ​बदल दिया। डॉ. अम्बेडकर 16 मार्च 1948 को दादा साहब गायकवाड़ को पत्र लिखते हैं जिसके मुताबिक, स्वास्थ्य की देखभाल के लिए किसी नर्स अथवा घर सम्भालने वाली औरत को रखने पर लोगों के मन मे शंकाएं पैदा होंगी। अतः शादी करना ही ज्यादा बेहतर होगा।”

शारदा कबीर से डॉ. अम्बेडकर की पहली मुलाकात

चूंकि डॉ. अम्बेडकर मधुमेह, उच्च रक्तचाप से पीड़ित थे। पैरों में न्यूरोपैथिक दर्द होने लगा था तथा नींद भी नहीं आती थी। इसलिए वह इलाज के लिए मुम्बई आ गए। शारदा कबीर अपनी आत्मकथा ‘डॉ. अम्बेडकरच्या सहवासत’ में लिखती है कि “डॉ. अम्बेडकर से उनकी पहली मुलाकात डॉ. एस. एम. राव के विले पार्ले स्थित घर पर हुई। डॉ. अम्बेडकर मुम्बई आने पर अक्सर डॉ. राव के घर आते-जाते थे। उन दिनों बाबा साहेब वायसराय की कार्यकारिणी में श्रम मंत्री थे। डॉ. एस. राव ने ही डॉ. भीमराव अम्बेडकर से डॉ. शारदा कबीर का परिचय करवाया था।

डॉ. शारदा कबीर लिखती हैं कि पहली मुलाकात में ही डॉ. अम्बेडकर ने बहुत गहराई से पूछताछ की क्योंकि उन दिनों वे महिला उत्थान को लेकर काम कर रहे थे। अम्बेडकर ने मेरा स्वागत किया और बौद्ध धर्म पर भी चर्चा की। डॉ. शारदा और अम्बेडकर की दूसरी मुलाकात डॉ. मावलंकर के सलाह कक्ष में हुई, तब भीमराव को उच्च रक्तचाप के अतिरिक्त जोड़ों में बहुत दर्द था। इस प्रकार मुलाकातों का सि​लसिला आगे बढ़ा। दोनों के बीच दूरियां कम हुई और निकटता बढ़ी। फिर क्या था, अम्बेडकर से अच्छी खासी पहचान होने के बाद साहित्य, समाज, धर्म आदि विषयों पर बहस होने लगी थी। शारदा लिखती हैं कि अम्बेडकर उनके तर्क को ध्यान से सुनते फिर अपनी बात कहते थे।

दरअसल शारदा कबीर ने मुंबई के ग्रांट मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया था। एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह गुजरात के एक अस्पताल में चीफ मेडिकल ऑफिसर के रूप में काम करने लगी थीं। बाद में वह मुम्बई में जाने माने डॉक्टर मालवणकर के साथ काम करने लगीं।

डॉ. अम्बेडकर ने शारदा कबीर को किस तरह किया प्रपोज?

महाराष्ट्र के रत्नागिरी ज़िले की राजापुर तहसील स्थित डोर्स गाँव से ताल्लुक रखने वाली शारदा कबीर का जन्म 27 जनवरी 1909 को सारस्वत ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम कृष्णराव विनायक राव कबीर और माँ का नाम जानकीबाई था। आजादी से पूर्व मुंबई के ग्रांट मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस  की पढ़ाई पूरी करने वाली डॉ. शारदा कबीर एक मेधावी छात्रा थीं। डॉ. शारदा कबीर अपनी आत्मकथा ‘डॉ. अम्बेडकरच्या सहवासत’ में लिखती हैं कि “आठ भाई-बहनों में से छह ने अंतरजातीय विवाह किया था लेकिन हमारे परिवार ने कभी विरोध नहीं किया। क्योंकि हमारा पूरा परिवार सुशिक्षित और प्रगतिशील था।”

डॉ. शारदा कबीर ने एक चिकित्सक के रूप में अविवाहित रहने का ही निर्णय लिया था। जब वह डॉ. भीमराव अम्बेडकर का इलाज कर रही थीं तब उनकी उम्र 38 साल थी। इलाज के दौरान ही वे डॉ. अंबेडकर के काफी नजदीक आ चुकी थीं। डॉ. अम्बेडकर ने जब डॉ. शारदा कबीर से शादी का प्रस्ताव रखा तब दोनों की उम्र के बीच 18 साल का फासला था।

डॉ. अम्बेडकर ने डॉ. शारदा कबीर को एक पत्र लिखा था जिसके मुताबिक,मेरे साथी मुझ पर शादी का दबाव बना रहें हैं लेकिन काबिल जीवनसाथी तलाशना काफी मुश्किल हो रहा है। मुझे लाखों लोगों के लिए जीवित रहना होगा, ऐसे में यह सही होगा कि मैं लोगों की सलाह पर गम्भीरता से विचार करूं। ऐसे में मैं आप से ही सही साथी तलाश शुरू करता हूं। मेरे आप के बीच उम्र का भी काफी फासला है तथा मेरी सेहत भी खराब है। ऐसे में यदि आप मेरे प्रस्ताव को खारिज करती हैं तो मुझे बुरा अथवा अपमानित महसूस नहीं होगा। सोचकर जवाब देना।

डॉ. शारदा कबीर (शादी के बाद सविता अम्बेडकर) अपनी आत्मकथा में लिखती हैं कि डॉ. अम्बेडकर की सेहत में सुधार होने पर ही वह भारत का संविधान बेहतर तरीके से लिख सकते थे। इसलिए मैं शादी के लिए राजी हो गई।

दिल्ली में हुई थी डॉ. अम्बेडकर और डॉ. शारदा कबीर की शादी

डॉ. भीमराव अम्बेडकर और डॉ. शारदा कबीर की शादी रजिस्ट्रार रामेश्वर दयाल (डिप्टी कमिश्नर, दिल्ली) की उपस्थिति में 15 अप्रैल 1948 को सम्पन्न हुई। उन दिनों बाबा साहेब हार्डिंग एवेन्यू (अब तिलक ब्रिज) में रहा करते थे। सोहन लाल शास्त्री की किताब ‘बाबा साहेब डॉ. बी आर आंबेडकर के सम्पर्क में पच्चीस वर्ष’ के अनुसार, “विवाह के अवसर स्वयं लेखक के अतिरिक्त मिस्टर मेसी (निजी सचिव), रामकृष्ण चाँदीवाला, एस्टेट ऑफिसर मेश्राम, शारदा कबीर का भाई, राय साहब पूरण चंद, नीलकण्ठ, होम सेक्रेटरी बनर्जी तथा उनकी पत्नी व अन्य लोग मौजूद थे। शादी के बाद भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल चक्रवती राजगोपालाचारी ने 28 जुलाई, 1948 को स्नेह भोज के लिए आमंत्रित कर नव दम्पत्ति का अभिनन्दन किया था।

डॉ. शारदा कबीर से बेइंतहा प्यार करते थे बाबा साहेब

अपनी चर्चित किताब ‘द बुद्धा एंड हिज धम्मा’ की भूमिका में डॉ. भीमराव अम्बेडकर अपनी पत्नी डॉ. शारदा कबीर (शादी के बाद सविता अम्बेडकर) की तारीफ में लिखते हैं कि “उन्होंने मेरी उम्र कम से कम 10 साल और बढ़ा दी।” विवाह के बाद डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने अपनी पत्नी का नया नाम सविता रखा और जीवन पर्यन्त शारदा को शारुकहते रहे। वहीं शारदा भी बाबा साहेब को ‘राजा’ कहकर ही बुलाती रहीं। डॉ. शारदा कबीर ने प्रैक्टिस छोड़कर अपना जीवन बाबा साहेब की देखभाल में लगा दिया और खुद को सिर्फ उन तक ही सीमित कर लिया।

तमाम नौकरों के बावजूद डॉ. भीमराव अम्बेडकर सुबह नाश्ते की मेज पर सविता अम्बेडकर के हाथों बनाया गए व्यंजन ही खाते थे। संसद जाते समय सविता अपने हाथों से उन्हें कोट पहनाती थीं। सविता अम्बेडकर अपनी आत्मकथा में लिखती हैं कि “वह बाबा साहेब के पसन्द की ही साड़ी पहनती थीं। इसके अतिरिक्त संसद के आगंतुक गलियारें में नियत स्थान पर जाकर उनकी नजरों की सीध में बैठती थीं ताकि अम्बेडकर अपना भाषण पढ़ते समय उन्हें देखकर अपनी बात सदन के समक्ष रख सकें।”

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