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Gujari Mahal in Hisar and Gwalior is a symbol of eternal love

अमर प्रेम की निशानी हैं हिसार और ग्वालियर में मौजूद गुजरी महल

भारतीय इतिहास में एक-दो नहीं कई अमर प्रेम कहानियां मौजूद हैं, जो आज भी आम जनमानस के जेहन में बसी हुई हैं। इनमें पृथ्वीराज और संयोगिता, सलीम-अनारकली, बाजीराव-मस्तानी, वीरमदेव-फिरोजा की अमर प्रेम कहानियां सर्वाधिक चर्चित हैं।

परन्तु इन ऐ​तिहासिक प्रेम कहानियों से इतर दो ऐसी रोचक प्रेम कहानियां हैं जो साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली खूबसूरत गुर्जर युवतियों की है। इनमें से एक गुर्जर युवती की प्रेम कहानी दिल्ली के सुल्तान फिरोजशाह तुगलक तथा दूसरी गुर्जर युवती की प्रेम कहानी ग्वालियर के राजा मानसिंह तोमर से जुड़ी है। ऐसे में इन दोनों ऐतिहासिक अमर प्रेम कहानियों से रूबरू होने के लिए इस रोचक स्टोरी को जरूर पढ़ें।  

1. गुजरी महल, हिसार

हरियाणा राज्य के हिसार जिले में मौजूद गुजरी महल वर्तमान में भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीन संरक्षित है। हिसार एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ है- ‘किला। हिसार किले के परिसर में ही गुजरी महल का निर्माण 1354 ई. में दिल्ली के सुल्तान फिरोज शाह तुगलक ने करवाया था। हिसार जिले का यह गुजरी महल दिल्ली के सुल्तान फिरोज शाह तुगलक और दूध बेचने वाली एक खूबसूरत गुर्जर युवती की अमर प्रेम कहानी का प्रतीक है।

गुजरी महल बनवाने से पहले सुल्तान फिरोज शाह तुगलक ने हिसार-ए-फ़िरोज़ा नामक एक किले का निर्माण करवाया। दीवान-ए-आम के पूर्वी हिस्से में फ़िरोज़ शाह तुग़लक़ का महल मौजूद है और गुजरी महल सुल्तान के महल का ही एक हिस्सा है। इंडो-इस्लामिक स्थापत्य शैली में निर्मित गुजरी महल को बनाने में दो साल लगे थे।

विशाल आयताकार मंच पर निर्मित गुजरी महल के निर्माण में काले पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। गुजरी महल की काफी मोटी दीवारें उसकी मजबूती को बयां करती हैं। गुजरी महल में ही एक खूबसूरत बगीचे और पक्के तालाब का निर्माण करवाया गया था, जिससे पूरे महल को पानी की आपूर्ति की जाती थी। इस सुन्दर गुजरी महल के कुछ हिस्से 675 साल बाद भी अपने ​अस्तित्व को बनाए हुए हैं। गुजरी महल के खंडहर इस बात की तरफ इशारा करते हैं कि पूर्व में यह कभी भव्य एवं शानदार इमारत रही होगी।

फिरोज शाह तुगलक और दूध बेचने वाली गुजरी की अमर प्रेम कहानी

यह ऐतिहासिक प्रेम कहानी उस दौर की है, जब दिल्ली सल्तनत की गद्दी पर सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक विराजमान था। मुहम्मद बिन तुगलक अपने चचेरे भाई फिरोजशाह तुगलक से विशेष प्रेम करता था क्योंकि फिरोजशाह उसकी प्रत्येक आज्ञा का पालन करता था। यही वजह है कि सुल्तान बनने से पूर्व फिरोजशाह तुगलक दिल्ली सल्तनत के महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रहा।

फिरोजशाह तुगलक एक बार हिसार के घने जंगलों में शिकार पर​ निकला था। शिकार खोजते-खोजते बहुत देर हो गई और उसे जोरों की प्यास लगी थी परन्तु प्यास बुझाने के लिए उसे कहीं पानी नहीं मिला। ऐसे में वह अपने घोड़े से गिरकर बेहोश हो गया। इस दौरान उसी रास्ते से एक दूध बेचने वाली गुर्जर युवती जा रही थी। उसने फिरोज शाह तुगलक को बेहोश पड़े देखा फिर उसे दूध पिलाया जिससे फिरोज शाह को होश आ गया।

इसके बाद से फिरोज शाह तुगलक जब भी शिकार करने जाता था, तब वह गुर्जरों की बस्ती में जरूर जाता था। ऐसे में धीरे-धीरे फिरोज शाह तुगलक और उस खूबसूरत गुर्जर युवती में अच्छी दोस्ती हो गई। दूसरों शब्दों में कहें तो फिरोज शाह तुगलक उस गुर्जर युवती को अपना दिल दे बैठा था।

साल 1351 में मुहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु के बाद फिरोज शाह तुगलक दिल्ली सल्तनत की गद्दी पर बैठा। सुल्तान बनने के बाद फिरोज शाह तुगलक ने उस गुजरी से शादी का प्रस्ताव रखा और दिल्ली चलने को कहा लेकिन उस दूध बेचने वाली गुर्जर युवती ने शादी के लिए हामी तो भर दी लेकिन दिल्ली जाने से इनकार कर दिया।

फिर क्या था, फिरोज शाह तुगलक ने सबसे पहले हिसार में ही एक किले का निर्माण करवाया और दुर्ग परिसर में खुद के महल के अतिरिक्त अपनी गुजरी प्रेमिका के लिए एक शानदार गुजरी महल का निर्माण करवाया। अब फिरोज शाह तुगलक दिल्ली के अतिरिक्त हिसार दुर्ग में भी अपना दरबार चलाने लगा।

हिसार स्थित यह गुजरी महल सुल्तान फिरोज शाह तुगलक और दूध बेचने वाली उस खूबसूरत गुर्जर युवती की अमर प्रेम कहानी की मिसाल है। यही नहीं, गुजरी महल से जुड़ी प्रेम कहानी से हिसार का बच्चा-बच्चा वाकिफ है।

2. गुजरी महल, ग्वालियर

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में मौजूद शानदार गुजरी महल का निर्माण राजा मानसिंह तोमर ने अपनी गुर्जरी रानी मृगनयनी के लिए 15वीं शताब्दी में करवाया था। ग्वालियर किले के भूतल में स्थित गुजरी महल का बाहरी स्वरूप आज भी पूरी तरह सुरक्षित है। ग्वालियर का गुजरी महल हिन्दू-मुगल वास्तुकला का बेहतरीन नमूना है।

बलुआ पत्थर से निर्मित ग्वालियर का गुजरी महल तकरीबन 71 मीटर लम्बा एवं 60 मीटर चौड़ा आयताकार भवन है, इस महल में एक विशाल आंगन है। रंगीन टाइल्स से अलंकृत सम्पूर्ण गुजरी महल के प्रस्तर खण्डों पर विभिन्न कलात्मक आकृतियां उकेरी गई हैं, जैसे-हाथी, मयूर आदि। कहीं-कहीं प्रस्तर खण्डों पर बेहतरीन पच्चीकारी भी की गई है, जो दर्शकों का आकर्षक ही मनमोह लेती हैं। गुजरी महल में मंदिर जैन गुफा व चतूर्भूज मंदिर जैसे स्मारक भी मौजूद हैं।

मुख्य द्वार पर फारसी भाषा में शिलालेख मौजूद है, जिससे गुजरी महल के निर्माण आदि की जानकारी मिलती है। ग्वालियर का यह गुजरी महल साल 1920 में एक संग्रहालय में परिवर्तित कर दिया गया जिसे 1922 ई. में आमजन के लिए खोल दिया गया। ग्वालियर के गुजरी महल में मौजूद संग्रहालय मध्यप्रदेश का सबसे पुराना संग्रहालय है जिसमें पुरातत्व इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण शिलालेख भी रखे गए हैं।

राजा मानसिंह तोमर और गुर्जर युवती मृगनयनी की प्रेम कहानी

ग्वालियर के राजा मानसिंह तोमर ने 1486 से 1516 ई. तक शासन किया। तोमर के सबसे प्रतापी राजा मानसिंह तोमर का दरबार सर्वदा ​कवियों, संगीतकारों तथा विद्वानों से सुशोभित रहता था। राजा मानसिंह का शासनकाल तोमर वंश का स्वर्णिम कालकहा जाता है।

यह अमर कहानी कुछ इस प्रकार शुरू होती है, एक बार राजा मान सिंह तोमर शिकार पर निकले थे तभी उनके रास्ते में दो शक्तिशाली भैंसे आपस में भिड़ गए। राजा का रास्ता बाधित हो गया, कोई भी उन दो शक्तिशाली भैंसों की लड़ाई छुड़ाने का साहस नहीं कर पा रहा था। तभी एक खूबसूरत गुर्जर युवती ने बड़ी बहादुरी के साथ उन दोनों लड़ते हुए भैसों को नियंत्रित कर उन्हें अलग कर दिया।

इसके बाद राजा मान सिंह तोमर न केवल उस गुजरी के साहस से प्रभावित हुए बल्कि उसकी खूबसूरती पर भी फिदा हो गए। कहते हैं, वह खूबसूरत गुर्जर युवती राजा मान सिंह तोमर के सपनों में भी आने लगी। फिर क्या था, उन्होंने उस गुजरी से विवाह का प्रस्ताव रखा। उस गुजरी ने राजा का प्रस्ताव तो स्वीकार कर लिया लेकिन इससे पहले उसने तीन शर्तें रखीं।

उस गूजरी की पहली शर्त यह थी कि वह बचपन से ही अपने गाँव 'मैहर राई के किनारे बहने वाली सांक नदी का पानी पीती आई है, अत: उसके महल में भी उसी नदी का पानी मिलना चाहिए। गुजरी रानी के गावं मैहर राई से ग्वालियर किले की दूरी तकरीबन 25 किमी. है। ऐसे में राजा मान सिंह तोमर ने गुजरी रानी के गावं से ग्वालियर किले तक नहर के द्वारा पानी लाने की समुचित व्यवस्था की।

गुजरी रानी की दूसरी शर्त यह थी कि विवाह के बाद उसके लिए अलग से महल बनवाया जाए। अत: राजा मान सिंह तोमर ने ग्वालियर किले के भूतल पर गुजरी महल का निर्माण करवाया। उस गुर्जर युवती की तीसरी शर्त यह थी कि वह राजा के अन्य रानियों की तरह केवल महल में ही कैद नहीं रहेगी बल्कि वह हमेशा राजा के साथ रहेगी, यहां तक कि रणक्षेत्र में भी। इस प्रकार राजा मान सिंह तोमर ने उस खूबसूरत गुर्जर युवती के तीनों शर्तों को पूर्ण कर उसके साथ विवाह किया। यह गुर्जर रानी अपनी खूबसूरती के कारण बाद में मृगनयनी कहलाई।

हांलाकि ग्वालियर का राजदरबार राजा मानसिंह तोमर और खूबसूरत गुर्जर युवती के प्रेम सम्बन्धों से नाखुश था बावजूद इसके राजा ने न केवल उस गुजरी से विवाह किया बल्कि एक शानदार गुजरी महल बनवाकर अपनी प्रेम कहानी को सदा-सदा के लिए अमर कर दिया।

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