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40 interesting facts about ShahJahan's most beautiful daughter Jahanara Begum

शाहजहां की सबसे खूबसूरत बेटी जहांआरा बेगम से जुड़ी 40 रोचक बातें

मुगल बादशाह शाहजहां की 14 संतानों में जहांआरा बेगम उसकी सबसे प्रिय बेटी थी। फ्रांसीसी इतिहासकार फ्रेंकोई बर्नियर अपनी किताब, 'ट्रैवेल्स इन द मुग़ल एम्पायर' में लिखता है कि शाहजहां अपनी सबसे बड़ी बेटी जहांआरा बेगम जो बेहद खूबसूरत थी, उसे पागलों की तरह प्यार करता था। बर्नियर यह भी लिखता है कि उन दिनों चारों तरफ यही चर्चा थी कि शाहजहां का अपनी बेटी जहांआरा के साथ नाजायज सम्बन्ध हैं। कुछ दरबारी यह भी कहते थे कि बादशाह को उस पेड़ से फल तोड़ने का पूरा हक़ है जिसे उसने ख़ुद लगाया है।

इस विवादास्पद कथन से इतर जहांआरा बेगम ने अपनी स्वेच्छा से आठ वर्ष तक आगरा किले के मुसम्मन बुर्ज में कैद अपने पिता शाहजहां की सेवा-सुश्रुषा उसके मृत्यु तक की। जानकारी के लिए बता दें कि मुमताज महल की मौत के बाद शाहजहां ने उसकी सम्पत्ति का आधा हिस्सा जहांआरा को दे दिया, ऐसे में जहांआरा महज 17 वर्ष की उम्र दुनिया की सबसे अमीर महिला बन गई। शाहजहां की सबसे प्रिय बेटी एवं औरंगजेब की बड़ी बहन जहांआरा से जुड़ी अन्य रोचक जानकारियों के लिए इस स्टोरी को जरूर पढ़ें।

शहजादी जहांआरा बेगम से जुड़ी  बेहद रोचक जानकारियां

1. जहांआरा बेगम के प्रारंभिक शिक्षा की जिम्मेदारी सती अल-निसा खानम को सौंपी गई, जो जहांगीर के पुरस्कार विजेता कवि तालिब अमुली की बहन थीं।

2. सती अल-निसा कुरान और फ़ारसी साहित्य के साथ-साथ शाही शिष्टाचार, गृह व्यवस्था एवं चिकित्सा ज्ञान की माहिर महिला थीं।

3. शाहजहां की सबसे प्रिय बेटी जहांआरा बेगम महज 17 साल की उम्र में भारत ही नहीं वरन दुनिया की सबसे अमीर महिला बन चुकी थी। 

4. जहांआरा बेगम को मुगलिया हुकूमत में बेगम साहिबा’,बादशाह बेगम फ़ातिमा ज़मां बेगम कहा जाता था।

5. शाहजहां की ताजपोशी के दिन जहांआरा बेगम को एक लाख स्वर्ण अशर्फियां एवं चार लाख रुपए दिए गए थे।

6. जहांआरा बेगम को तकरीबन 2 करोड़ रुपए सालाना पॉकेट मनी मिलती थी।

7. मुगल बादशाह शाहजहां अपनी बेटी जहाँआरा बेगम की देखरेख में बना खाना ही खाता था।

8. मुमताज महल की मौत के बाद उसकी आधी सम्पत्ति जहांआरा को दी गई बाकी आधे हिस्से को सभी बच्चों में बांट दिया गया।

9. शहजादी जहांआरा के पास एक-दो नहीं बल्कि कई जागीरें थीं।

10. जहांआरा को सूरत शहर भी सुपूर्द किया गया था, जहां उनके कई व्यापारिक जहाज चलते थे।

11. सूरत बन्दरगाह से मिलने वाली समस्त आय (5 लाख रुपए वार्षिक) जहांआरा को प्राप्त हो​ती थी।

12. जहांआरा बेगम के व्यापारिक जहाज का नाम साहिबी था, जो डच और अंग्रेजों के साथ व्यापार करने के लिए सात समन्दर पार जाता था।

13. बादशाह शाहजहां के जन्मदिन से लेकर नवरोज आदि उत्सवों की मुख्य कार्यवाहक जहांआरा बेगम ही थी।

14. नवरोज के अवसर पर जहांआरा बेगम को 20 लाख के आभूषण और जवाहरात तोहफे में मिले थे।

15. साल 1637 में जहांआरा बेगम ने बादशाह शाहजहां को ढाई लाख का अष्टकोणीय सिंहासन अपनी तरफ से भेंट किया था।

16. साल 1644 में जहांआरा बेगम आग की चपेट में झुलस गई थीं जिससे उन्हें आठ महीनें तक बिस्तर पर रहना पड़ा।

17. जहांआरा के स्वस्थ होने के बाद कई कैदियों को रिहा किया गया तथा जहांआरा को सोने से तौला गया एवं उस सोने को गरीबों में बांट दिया गया

18. जहांआरा जब पूरी तरह से स्वस्थ्य हो गई तब बादशाह शाहजहां उसे खुद अजमेर में मुइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर ले गया था।

19. इतना ही नहीं,  शाहजहां ने जहांआरा को 130 मोती और पांच लाख रुपए के कंगन उपहार में दिए।

20. शाहजहां ने जहांआरा बेगम को सरपेच भी दिया था जिसमें हीरे-मोती जड़े हुए थे।

21. दाराशिकोह की शादी मुगलकाल की सबसे महंगी थी जिसमें तकरीबन 32 लाख रुपए खर्च हुए थे। इसमें जहांआरा बेगम ने 16 लाख रुपए अपनी तरफ से दिए थे।

22. दारा शिकोह के निकाह के दौरान उनकी बेगम नादिरा बानो ने 8 लाख रुपए का लहंगा पहना था, इस लहंगे का खर्च भी जहांआरा ने उठाया था।

23. जहांआरा बेगम की सालाना आय 30 लाख रुपए होती थी जो आज के जमाने में डेढ़ अरब रुपए के बराबर है।

24. जहांआरा बेगम को मुगल काल की सबसे शक्तिशाली महिला माना जाता था।

25. जहांआरा बेगम की खरीददारी के लिए शाहजहां ने चांदनी चौक का निर्माण करवाया।

26. जहांआरा बेगम ने स्वेच्छा से आठ वर्ष तक आगरा किले के मुसम्मन बुर्ज में कैद अपने पिता शाहजहां की मृत्यु तक सेवा की।

27. जहांआरा ने अपने जेब खर्च से आगरा की जामा मस्जिद का निर्माण करवाया था। इस मस्जिद के निर्माण में कुल पांच लाख रुपए खर्च हुए थे।

28. जहांआरा ने व्यापारियों के ठहरने के लिए पेशावर में एक आधुनिक सराय का निर्माण करवाया जिसे 'कारवां सराय', 'सराय जहां बेगम' और 'सराय दो दर' के नाम से जाना जाता है।

29. जहांआरा बेगम संरक्षित पेशावर की सराय जहां बेगम 1638 में बनना शुरू हुई और 1641 ई. में बनकर तैयार हुई।

30. चांदनी चौक का नक्शा भी जहांआरा बेगम ने तैयार किया था।

31. शाहजहांनाबाद (पुरानी दिल्ली) का पूरा नक्शा जहांआरा बेगम द्वारा तैयार किया गया था।

32. शाहजहांनाबाद शहर की 19 में से 5 इमारतें जहांआरा बेगम ने बनवाई थी।

33. उत्तराधिकार के युद्ध में जहाँआरा ने दारा शिकोह का साथ दिया था बावजूद इसके बादशाह बनने के बाद औरंगजेब ने अपनी बड़ी बहन जहांआरा को पादशाह बेगम की उपाधि से नवाजा।

34. इतिहासकार निकोलाओ मनूची अपने यात्रा संस्मरण में लिखता है कि जहांआरा बेगम के कई प्रेमी थे, जो चुपके-चुपके उनसे मिलने आते थे

35. जहांआरा बेगम को एकबारगी दारा शिकोह के निजी डाक्टर से इश्क हो गया था, परन्तु सख्त पहरे के बीच वह आशिक पकड़ा गया और बादशाह शाहजहां ने उसे पानी के देग में उबाल दिया।

36. जहांआरा बेगम आजीवन अवि​वाहित रहीं। कहते हैं, शाहजहां को जहांआरा बिल्कुल मुमताज की तरह लगती थी इसलिए उसने जहांआरा की शादी किसी और से नहीं की।

37. औरंगजेब के शासनकाल के दौरान जहांआरा बेगम की मौत 67 साल की उम्र में 16 सितम्बर 1681 को हुआ था।

38. औरंगज़ेब ने जहांआरा बेगम को मरणोपरांत साहिबात-उज़-ज़मानी (युग की मालकिन) की उपाधि दी।

39. जहांआरा ने अपने जीवनकाल में ही अपनी कब्र (सफ़ेद संगमरमर निर्मित) बनवाई थी जो दिल्ली के हजरत निज़ामुद्दीन दरगाह परिसर में स्थित है।

40. जहांआरा बेगम की कब्र की शिलालेख पर उत्कीर्ण है, “अल्लाह जीवित, कायम रखने वाला है। मेरी कब्र को हरियाली के सिवाय कोई न ढक सके, क्योंकि कंगालों की कब्र के लिए घास ही काफी है

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