सनातन में मानव जीवन चार पुरुषार्थ पर आधारित है - 1. धर्म 2. अर्थ 3. काम और 4. मोक्ष। वैदिक काल में भी धर्म और अर्थ के बाद काम को ही प्रधानता दी गई है। धर्म, अर्थ और काम का महत्व दैनिक जीवन से जुड़ा है जबकि मोक्ष का सम्बन्ध जन्म-मृत्यु के चक्र से है।
महर्षि वात्स्यायन रचित ‘कामसूत्र’ एक ऐसा ग्रन्थ है जिसका वर्चस्व विगत कई शताब्दियों से पूरे विश्व में आज भी कायम है। तकरीबन विश्व की प्रत्येक भाषा में ‘कामसूत्र’ का अनुवाद हो चुका है। प्रासंगिक ग्रन्थ कामसूत्र के विषय में आमजन के बीच कुछ भ्रांतियां भी जुड़ी हुई हैं।
अब आपका सोचना लाजिमी है कि आखिर में कामसूत्र नामक ग्रन्थ में ऐसा लिखा है, जिसका प्रभाव कई ग्रन्थों में देखने को मिलता है। इसके अलावा कामसूत्र का वैश्विक इतिहास क्या है? इन सभी प्रश्नों का उत्तर जानने के लिए यह रोचक स्टोरी जरूर पढ़ें।
महर्षि वात्स्यायन रचित कामसूत्र
हिन्दुस्तान के ज्यादातर विद्वानों का मानना है कि महर्षि वात्स्यायन ने विश्व विख्यात ग्रन्थ ‘कामसूत्र’ की रचना चौथी शताब्दी के मध्य में की होगी। आजीवन ब्रह्मचारी रहने वाले वात्स्यायन ऋषि का जन्म बिहार के किसी स्थान पर हुआ था। उन्होंने अपना काफी वक्त वाराणसी में बिताया, इसके बाद वेदज्ञाता वात्स्यायन पटना में रहने लगे थे।
हिन्दी विश्वकोश के अनुसार, आचार्य चाणक्य के प्रधान शिष्य कामन्दक (नीतिसार के रचयिता) ही वात्स्यायन थे। जबकि कुछ विद्वानों के अनुसार, सुबन्धु रचित ‘वासवदत्ता’ में कामसूत्र के रचनाकार का नाम 'मल्लनाग' है, ऐसे में स्पष्ट है, वात्स्यायन का एक नाम ‘मल्लनाग’ भी था।
सात अधिकरणों में विभक्त कामसूत्र ग्रन्थ में 36 अध्याय तथा 1250 श्लोक हैं। कामसूत्र के बारे में ज्यादातर लोगों में यह भ्रांतियां है कि इसमें केवल विभिन्न प्रकार यौन आसन (सेक्स पोजिशन) का वर्णन है।
कुछ लोग यह भी सोचते हैं कि कामसूत्र में केवल यौन सम्बन्धों की बात की गई है जबकि इस ग्रन्थ के 36 अध्यायों में से सिर्फ एक अध्याय में यौन सम्बन्ध बनाने सम्बन्धित वर्णन है। एक भ्रांति यह भी है कि आज की तारीख में कामसूत्र ग्रन्थ की कोई प्रासंगिकता नहीं है।
कामसूत्र ग्रन्थ का अंग्रेजी अनुवाद करने वाले आदित्य नारायण हक्सर के मुताबिक, “संस्कृत में काम का अर्थ सेक्स नहीं बल्कि अपनी इच्छा का पूर्ण करने का सुख लेना है।” कुछ इसी तरह से लेखिका संध्या मूलचंदानी अपनी किताब 'द कामसूत्र फ़ॉर वीमेन' में लिखती है कि “कई मायनों में कामसूत्र ग्रन्थ एक आधुनिक किताब है। बतौर उदाहरण- कामसूत्र में यह कहा गया है कि यौन संबंध में महिला की सहमति होनी चाहिए। इस ग्रन्थ में यह भी बताया गया है कि अपने साथी की बात किस प्रकार से सुने और कैसे स्वार्थी की तरह व्यवहार नहीं करें।”
कुछ इसी तरह से चर्चित किताब ‘रिडिमिंग द कामसूत्रा’ की लेखिका वेंडी डोनिगर ने महर्षि वात्सयायन कृत कामसूत्र के बारे में लिखा है कि “इस किताब को जीवन जीने की कला यानि आर्ट ऑफ लिविंग की तरह देखना चाहिए।”

कामसूत्र ग्रन्थ की वैश्विक लोकप्रियता
महर्षि वात्स्यायन रचित कामसूत्र दुनियाभर में सबसे ज्यादा बिकने वाले ग्रंथ का नाम है। कामसूत्र का वर्चस्व पूरे संसार में सत्रहवीं शताब्दी से लेकर आज तक कायम है। कामसूत्र के कई संस्करण एवं भाष्य प्रकाशित हो चुके हैं और हो रहे हैं।
दुनिया की सबसे लोकप्रिय किताबों में शामिल ‘कामसूत्र’ का तकरीबन प्रत्येक भाषा में अनुवाद हो चुका है। अरब के विख्यात कामशास्त्र ‘सुगन्धित बाग’ पर भी गुप्तकाल में रचित कामूसूत्र की अमिट छाप देखने को मिलती है। इतना ही नहीं, कामसूत्र को आधार बनाकर कई फिल्में भी बन चुकी हैं।
तकरीबन 200 वर्ष पूर्व ब्रिटेन के विख्यात भाषाविद सर रिचर्ड एफ़ बर्टन ने जब कामसूत्र का अंग्रेजी अनुवाद किया तब हर तरफ तहलका मच गया। हांलाकि इस काम में बर्टन के मित्र भारतीय पुरातत्वविद् भगवान लाल इंद्रजी तथा शिवराम परशुराम भिड़े नामक छात्र ने भी खूब मदद की थी। साल 1883 में छपी अंग्रेजी अनुवादित पुस्तक कामसूत्र की एक-एक प्रति 100 से 150 पौंड में बिकी थी।
अभी हाल में ही ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर द्वारा संसद में कामसूत्र से जुड़ी टिप्पणी करने के बाद यह ग्रन्थ एक बार फिर से चर्चा में है। एक सवाल के जवाब में ब्रिटिश प्रधानमंत्री स्टार्मर ने कहा कि “विपक्ष ने 14 साल में कामसूत्र से ज्यादा पोजिशन बदली हैं।”
यदि हिन्दुस्तान की बात करें तो अर्थ के क्षेत्र में जो स्थान आचार्य चाणक्य रचित अर्थशास्त्र को प्राप्त है, वही स्थान काम के क्षेत्र में महर्षि वात्स्यायन कृत ‘कामसूत्र’ को प्राप्त है। ‘गीत गोविन्द’ के लेखक जयदेव ने अपनी लघु कृति ‘रतिमंजरी’ में कामसूत्र का सार संक्षेप में प्रस्तुत किया है।
राजस्थान की यौन चित्रकारी तथा खजुराहो, कोणार्क की जीवन्त शिल्पकला भी कामसूत्र से प्रेरित है। इसके अतिरिक्त कर्नाटक के भत्कल मंदिर, तमिलनाडु के कामाक्षी अम्बा मंदिर, एलोरा के कैलाश मंदिर, आंध्र प्रदेश के आलमपुर स्थित ब्रह्मा मंदिर में मौजूद मिथुन मूर्तियां भी कामसूत्र ही पर आधारित हैं।
कामसूत्र आधारित चार टीकाएं प्रसिद्ध हैं- 1. राजा वीसलदेव के शासनकाल में यशोधर कृत ‘जयमंगला’। 2. वीरसिंहदेव बघेला रचित ‘कन्दर्पचूड़ामणि’। 3. काशी के विद्वान भास्कर नरसिंह रचित ‘कामसूत्र व्याख्या’। 4. मेवाड़ के महाराणा कुम्भा कृत ‘कामराज-रतिसार’।
कामसूत्र का विषय वस्तु
36 अध्याय तथा 1250 श्लोकों से परिपूर्ण कामसूत्र ग्रन्थ में सात अधिकरण (सात हिस्से) हैं। कामसूत्र के पहले अधिकरण में नागरिक जीवनयात्रा का रोचक वर्णन है। जबकि दूसरे अधिकरण में रतिशास्त्र (रतिक्रीड़ा, आलिंगन, चुम्बन आदि) का विस्तृत विवरण है, यह संपूर्ण ग्रंथ का 20 फीसदी है।
कामसूत्र ग्रन्थ के तीसरे अधिकरण में कन्या वरण एवं विवाह सम्बन्धित वर्णन, चौथे अधिकरण में पत्नी का कर्तव्य, पत्नी के साथ व्यवहार तथा राजाओं अन्त:पुर का उल्लेख, पांचवें अधिकरण में स्त्री को वश में करने, छठें अधिकरण में वेश्याओं के आचरण एवं क्रियाकलापों तथा धनिकों को वश में कैसे करें, इसका विस्तृत वर्णन किया गया है।
कामसूत्र का सातवां एवं अंतिम अधिकरण वैद्यक शास्त्र से सम्बन्धित है जिसमें उन औषधियों का वर्णन है जिनका सेवन करने से शारीरिक तेज एवं शक्ति, दोनों में अभिवृद्धि होती है।
महर्षि वात्स्यायन रचित कामसूत्र में जिन 64 कलाओं का जिक्र है, उनमें मुख्यत: गायन, वाद्य, नृत्य, नाट्य, चित्रकारी, कूटनीति, विभिन्न भाषाओं का ज्ञान, समस्त कोशों का ज्ञान तथा प्रबन्धन में चार्तुयता आदि से जुड़ी उपादेयता की विस्तृत जानकारी दी गई।
कामसूत्र में शिल्पकला एवं साहित्य का विस्तृत वर्णन किया गया है, जैसे - पाक कला, नाटक आख्यायिका आदि की रचना करना, समस्त छन्दों का ज्ञान, मन्त्रविद्या, बढ़ईगिरी, मूर्ति निर्माण, धातु परीक्षण (स्वर्ण-रजत, हीरा-पन्ना आदि), कपड़े और आभूषण बनाना, बेल-बूटे गलीचे, दरी आदि बनाना शामिल है।
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