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The truth about the weight of Maharana Pratap's sword, spear, and armor

महाराणा प्रताप : 81 किलो का भाला और 72 किलो का कवच, क्या है सच?

सिसोदिया राजवंश का सूर्य कहे जाने वाले महाराणा प्रताप के शौर्य एवं वीरता का बखान भारतीय तथा ब्रिटिश इतिहासकारों ने एक सुर में किया है। महाराणा प्रताप के असीम शौर्य को देखते हुए ब्रिटिश इतिहासकार कर्नल जेम्स टॉड ने हल्दीघाटी युद्ध को राजस्थान की थर्मोपल्ली एवं दिवेर युद्ध को मेवाड़ का मैराथन की संज्ञा दी है तथा प्रताप के गौरव का प्रतीक कहा है।

सैकड़ों वर्षों बाद भी मेवाड़ केसरी महाराणा प्रताप के शौर्य की गाथाएं आज भी जनमानस के बीच बड़े गर्व के साथ सुनी-सुनाई जाती हैं। किन्तु महाराणा प्रताप से जुड़े कुछ ऐसे दावे भी हैं जो सोशल मीडिया में प्रचलित धारणा बन चुके हैं। ऐसा दावा किया जाता रहा है कि महाराणा प्रताप के भाले का वजन 81 किलो तथा उनके कवच का वजन 72 किलो था। जबकि महाराणा प्रताप के दो तलवारों समेत कवच, ढाल और और भाले का कुल वजन 208 किलो था। यह भी प्रचलित धारणा है कि महाराणा प्रताप की कद-काठी 7 फीट 5 इंच की थी और वह स्वयं 110 किलो के थे।

अत: हैरान करने वाली बात यह है कि तकरीबन 3 कुन्तल 18 किलो वजन के साथ चेतक पर सवार होकर महाराणा प्रताप युद्धभूमि में शत्रुओं का संहार करते थे। अब प्रश्न यह उठता है कि क्या सच में महाराणा प्रताप की तलवार, ​कवच-ढाल और भाले का कुल वजन 208 किलो था? इतना ही नहीं, क्या सच में महाराणा प्रताप लम्बाई 7 फीट 5 इंच थी और वजन 110 किलो था?  यदि आप महाराणा प्रताप से जुड़े इस दावे का सच जानना चाहते हैं तो यह स्टोरी जरूर पढ़ें।

उदयपुर सिटी पैलेस म्‍यूजियम में क्या लिखा है

आपको जानकारी के लिए बता दें कि उदयपुर सिटी पैलेस म्यूजियम में लगे बोर्ड के मुताबिक, “महाराणा प्रताप के निजी अस्त्र- शस्त्रों का कुल वजन 35 किलो है।मेवाड़ के प्रिन्स लक्ष्यराज सिंह के अनुसार, “महाराणा प्रताप के भाले का वजन 3 से 4 किलो रहा होगा। में कहना बिल्कुल उचित है कि महाराणा प्रताप तकरीबन 35 किलो वजन वाले अस्त्र-शस्त्रों के साथ युद्ध भूमि में उतरते थे।

महाराणा ऑफ मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर भूपेंद्र सिंह आउवा के मुताबिक, “आखिर में 80 किलो की तलवार लेकर महाराणा प्रताप चेतक पर सवार होकर युद्ध कैसे लड़ सकते थे और फिर 80 किलो की वो तलवार कहां है?” जबकि सच यह है कि उदयपुर म्यूजियम में रखी महाराणा प्रताप के तलवार का वजन तकरीबन 2 किलो है।

ऐसे में यह दावा पूरी तरह से भ्रामक है कि महाराणा प्रताप के दो तलवारों समेत कवच, ढाल और भाले का कुल वजन 208 किलो था।

महाराणा प्रताप की कद-काठी 

महाराणा प्रताप की कद-काठी के बारे में यह दावा किया जाता है कि वह 7 फीट 5 इंच लम्बे थे जबकि उनका वजन 110 किलो था, हांलाकि इस बारे में कोई पुख्ता सबूत नहीं है। अधिकांश इतिहासकारों के अनुसार, महाराणा प्रताप की कद-काठी 5 फीट 8 इंच से 5 फीट 10 इंच के बीच थी।

वहीं, मेवाड़ के प्रिन्स कहे जाने वाले लक्ष्यराज सिंह का ऐसा कहना है कि महाराणा प्रताप की हाईट साढ़े पांच फीट से छह फीट तक हो सकती है। सामान्यतया पश्चिमी राजस्थान के लोगों की लम्बाई 6 फीट से 6 फीट 6 इंच के बीच होती है, जबकि मेवाड़ के लोगों की हाईट कुछ कम ही होती है।

महाराणा प्रताप के शौर्य-स्वाभिमान का प्रशंसक था अकबर

महाराणा प्रताप के मृत्यु की खबर सुनकर बादशाह अकबर के आखों में भी आंसू आ गए थे। दरअसल अकबर के दरबार में उपस्थित दुरसा हाड़ा ने इस स्थिति का वर्णन कुछ इस प्रकार किया है

अस लेगो अणदाग पाग लेगो अणनामी

गो आडा गवड़ाय जीको बहतो घुरवामी

नवरोजे न गयो न गो आसतां नवल्ली

न गो झरोखा हेठ जेठ दुनियाण दहल्ली

गहलोत राण जीती गयो दसण मूंद रसणा डसी

निसा मूक भरिया नैण तो मृत शाह प्रतापसी

उपरोक्त पंक्तियों का आशय यह है कि महाराणा प्रताप तेरी मृत्यु पर बादशाह अकबर ने दांतों के बीच जीभ दबाई और नि:श्वास के साथ आंसू टपकाए। क्योंकि तूने अपने घोड़ों पर मुगलिया दाग नहीं लगने दिया और अपनी पगड़ी को किसी के सामने नहीं झुकाया, तू कभी शाही झरोखे के नीचे नहीं खड़ा रहा। वास्तव में तू सब तरह से जीत गया। नि:सन्देह महाराणा प्रताप सर्वदा शौर्य-स्वाभिमान और गौरव की प्रतिमूर्ति बने रहेंगे।

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