दोस्तों, हम सभी जानते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है, किन्तु उनका सर्वाधिक प्रसिद्ध भोग माखन-मिश्री है। भगवान श्रीकृष्ण को मावा (खोये) और इलायची से बना मथुरा का पारम्परिक पेड़ा भी खूब पसन्द है।
किन्तु क्या आप जानते हैं, भगवान श्रीकृष्ण को एक अन्य स्वादिष्ट मिठाई भी अत्यंत पसन्द है, जो समूचे गुजरात में बेहद लोकप्रिय है। आप सही सोच रहे हैं बेसन, देशी घी और मेवों से बनी इस मिठाई का नाम भगवान 'मोहन' (कृष्ण) के नाम पर ही है।
जी हां, भगवान श्रीकृष्ण की पसंदीदा मिठाई का नाम मोहनथाल (मोहनभोग) है। अत: भोजन इतिहास से जुड़ी इस रोचक स्टोरी में हम आपको गुजरात की लोकप्रिय मिठाई मोहनथाल से रूबरू कराने की कोशिश करेंगे।
भगवान कृष्ण की पसंदीदा मिठाई मोहनथाल
गुजरात के सनातनियों के मध्य ऐसी मान्यता है कि मोहनथाल मिठाई भगवान श्रीकृष्ण को बेहद पसन्द थी। यही वजह है कि जन्माष्टमी और दिवाली जैसे धार्मिक त्यौहारों पर भगवान श्रीकृष्ण के मंदिरों में प्रसाद के रूप में मोहनथाल मिठाई ही चढ़ाई जाती है।
प्राचीन पारंपरिक भारतीय मिठाई मोहनथाल का नाम भगवान कृष्ण के एक नाम 'मोहन' और थाली के अर्थ वाले शब्द 'थाल' से मिलकर बना है। स्पष्ट है कि भगवान श्रीकृष्ण के आकर्षक व्यक्तित्व के चलते उनका एक नाम मोहन भी है। जबकि संस्कृत शब्द स्थल से व्युत्पन्न थाल का अर्थ- थाली होता है। मोहनथाल के सन्दर्भ में थाल वह पात्र है जिसमें भोग (प्रसाद) रखा जाता है।

विशुद्ध गुजराती और राजस्थानी मिठाई है मोहनथाल
बेसन, शुद्ध घी और चीनी से बनाई जाने वाली स्वादिष्ट मिठाई मोहनथाल विशुद्ध रूप से हमें गुजरात और राजस्थान की संस्कृति और पाक कला से रूबरू कराती है। इन दोनों राज्यों (गुजरात और राजस्थान) में शादी- ब्याह और तीज त्यौहारों के मौके पर मोहनथाल मिठाई विशेष रूप से बनाई जाती है।
बता दें कि गुजरात राज्य में खाई जाने वाली लोकप्रिय मिठाई मोहनथाल का पारम्परिक स्वाद अहमदाबाद, आनंद, वडोदरा और पालनपुर जैसे शहरों में आज भी बेहद आसानी से देखने को मिल जाता है। गुजरात में मोहनथाल की पॉपुलारिटी का अन्दाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश के सबसे धनी व्यक्ति मुकेश अम्बानी के बेटे अनंत अम्बानी के प्री वेडिंग फंक्शन में इस मिठाई को परोसा गया था।
यदि हम राजस्थान की बात करें तो दानेदार व शुद्ध घी वाले मोहनथाल जयपुर के पुराने मिष्ठान भंडारों पर आसानी से मिल जाते हैं। वहीं सीकर (खाटूश्यामजी) में श्याम बाबा को मोहनथाल का भोग लगाने की विशेष परंपरा है, यही वजह है कि इस क्षेत्र में मोहनथाल खूब लोकप्रिय है।
मारवाड़ और मेवाड़ में मोहनथाल को वैवाहिक कार्यक्रमों और त्योहारों पर विशेष रूप से तैयार किया जाता है। वहीं ब्रज सीमावर्ती क्षेत्रों में जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण के भोग के रूप में मोहनथाल को घर-घर में बड़े शौक तैयार किया जाता है।
गुजराती और राजस्थानी मोहनथाल में खास अंतर
गुजराती और राजस्थानी मोहनथाल मिठाई में बहुत बारीक अंतर है। बता दें कि पारंपरिक गुजराती मोहनथाल बिना मावा के शुद्ध बेसन, घी और चीनी से बनती है। जबकि राजस्थानी मोहनथाल में बेसन, शुद्ध घी और चीनी के साथ-साथ मावे (खोया) का भी उपयोग किया जाता है।
राजस्थानी मोहनथाल तैयार करते समय बेसन को घी और दूध के मिश्रण से मला जाता है (जिसे 'ढोक' देना कहते हैं) ताकि यह दानेदार बने। राजस्थानी मोहनथाल में बेसन को शुद्ध घी में भूनकर इसमें मावा (खोया) मिलाया जाता है, तत्पश्चात इसमें चीनी और ड्राई फ्रूट्स डालकर अच्छे से पकाकर बर्फी की तरह सेट किया जाता है।
स्वादिष्ट मिठाई मोहनथाल बनाने की विधि
विशुद्ध भारतीय मिठाई मोहनथाल को पारंपरिक बेसन (चना आटा), शुद्ध घी और चीनी से तैयार किया जाता है। इसमें मावा (खोया) और ड्राई फ्रूट्स (बादाम, काजू-किशमिश, इलायची आदि) जैसी कई अन्य सामग्रियां भी मिलाई जाती हैं।
मोहनथाल बनाने की सामग्री एवं विधि - दो कप- बेसन (चने का आटा), आधा कप- दूध, एक चौथाई छोटा चम्मच -इलायची पाउडर, आधा कप-चीनी, तीन चौथाई कप-शुद्ध घी और कटे हुए ड्राई फ्रूट्स।
एल्यूमीनियम की कड़ाही में शुद्ध घी डालकर गर्म होने दें। तत्पश्चात चने के बेसन को घी में डालकर धीमी आंच में भूनें। जब बेसन भून जाए तब उसमें इलायची पाउडर और ड्राई फ्रूट्स डालकर बेसन को थोड़ा खुशबू आने तक भूनें।
बेसन के भूनने तक चीनी की चाशनी बनाएं और जब चाशनी तैयार हो जाए तो उसमें इलायची पाउडर, ड्राई फ्रूट्स वाले भूने हुए बेसन को मिक्स करें। बेसन में अतिरिक्त स्वाद के लिए मावा अथवा दूध डालकर अच्छी तरह से पकाएं। उपरोक्त मिश्रण जब पककर कड़ाही से अलग होने लगे तब आंच बन्द कर दें और घी लगे प्लेट में मिठाई को डालकर फैला लें। जब मोहनथाल ठंडी हो जाए तब उसे बर्फी के आकार में काटकर परोसें।
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