हिन्दू धर्म को दुनिया का सबसे प्राचीन एवं जीवित धर्म माना जाता है। जब हम यह बात करते हैं कि हिन्दू धर्म की शुरूआत कब और कैसे हुई थी? तब यह गूढ़ विषय बन जाता है क्योंकि हिन्दू धर्म के सही उम्र का पता लगाना इतना आसान काम नहीं है।
ईसाई और इस्लाम जैसे अन्य धर्मों से विपरीत हिन्दू धर्म का कोई एक संस्थापक, पैगम्बर अथवा गुरु नहीं है; अथवा न ही इसके शुरूआत की कोई निश्चित तारीख है। ऐसे में यदि हम भारत की पौराणिक मान्यताओं एवं ऐतिहासिक शोधों की बात करें तो स्पष्टतया इसमें बहुत बड़ा अन्तर दृष्टिगोचर होता है।
यही वजह है कि आज हम इस स्टोरी में यह समझने की कोशिश करेंगे कि हिन्दुस्तान की पौराणिक मान्यताओं एवं ऐतिहासिक शोधों के मुताबिक आखिर में हिन्दू धर्म कितना पुराना है?
हिन्दू समुदाय की पौराणिक मान्यताएं
हिन्दुस्तान के पौराणिक ग्रन्थों के अनुसार, हिन्दू धर्म का इतिहास सृष्टि की उत्पत्ति से ही माना जाता है। हिन्दु समुदाय की कालमापनी सबसे बड़ी एवं प्राचीन है। हिन्दू धर्म के अनुसार, इस धरती के प्रथम मानव का नाम स्वयंभू मनु तथा प्रथम स्त्री का नाम सतरुपा था।
महान पौराणिक ग्रन्थ महाभारत में आठ मनुओं का उल्लेख मिलता है। आठवें मनु वैवस्वत के काल में ही भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार हुआ था। वर्तमान में धरती पर आठवें मनु वैवस्वत की ही संतानें हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार, त्रेतायुग में भगवान श्रीराम और द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म बताया जाता है।
सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलियुग की अवधि
हिन्दू धर्म ग्रन्थों में चार युगों का वर्णन है — 1. सतयुग 2. त्रेता 3. द्वापर और 4. कलियुग। इनमें सतयुग की अवधि तकरीबन 17 लाख 28 हजार वर्ष, त्रेता की अवधि 12 लाख 96 हजार वर्ष, द्वापर की 8 लाख 64 हजार वर्ष तथा कलियुग की अवधि 4 लाख 32 हजार वर्ष की बताई गई है।
हैरानी की बात है कि कलियुग के 4 लाख 32 हजार वर्ष में से अभी कुछ हजार वर्ष ही बीते हैं, जिसे कलियुग का प्रथम चरण कहा जाता है। यदि हम पौराणिक ग्रन्थों के आधार पर इन चार युगों का ही आंकलन करें तो स्पष्ट हो जाता है कि हिन्दू धर्म का इतिहास लाखों-करोड़ों वर्ष पुराना है। सनातन के मुताबिक, इससे पहले किसी भी धर्म के होने का प्रमाण नहीं मिलता, ऐसे में हिन्दू धर्म ही दुनिया का सबसे पुराना धर्म है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह धर्म अनादि और अनंत काल से है।
ऐतिहासिक शोध : हिन्दू धर्म की प्राचीनता
हिन्दू धर्म को दुनिया का सबसे प्राचीन धर्म माना जाता है। इस धर्म की उत्पत्ति का पता लगाना इतना आसान काम नहीं है, अपितु यदि हम वैज्ञानिक शोधों की बात करें तो इसकी शुरुआत लगभग 5,000 साल पहले हुई होगी। हिन्दू धर्म की जड़ें दुनिया की सबसे शुरुआती सभ्यताओं में से एक सिन्धु घाटी सभ्यता (3300–1300 ईसा पूर्व) से जुड़ी हो सकती है।
सिन्धु घाटी सभ्यता और हिन्दू धर्म
सिंधु नदी घाटी में बसी सिंधु घाटी सभ्यता को 'हड़प्पा संस्कृति' (कांस्य युग) के नाम से भी जाना जाता है। यह नाम इसके दो शहरी केंद्रों—हड़प्पा और मोहनजो-दड़ो—में से एक, हड़प्पा के नाम पर पड़ा है। इन शहरों से पुरातत्वविदों को मुहरें, मूर्तियां तथा ऐसी कई चीजें मिली हैं जो हिन्दू धर्म की उत्पत्ति की तरफ इशारा करती हैं। जैसे— कांसे की मूर्तियां, योग मुद्रा में बैठी आकृतियां, प्रजनन की देवी जैसी लगने वाली मिट्टी की महिला मूर्तिंया तथा हिन्दू देवता शिव से जुड़े लिंग आकार आदि।
पुरातत्वविदों को हड़प्पा सभ्यता से धार्मिक स्नान और पशु बलि के भी प्रमाण मिले हैं। हैरानी की बात है कि हड़प्पा संस्कृति की लेखन-पद्धति को आजतक समझा नहीं जा सका है। अत: यह दावे के साथ कह सकते हैं कि हिन्दू धर्म मान्यताओं के बारे में हमारी समझ अभी भी सीमित है।
हिंदू धर्म के सबसे पुराने लिखित प्रमाण
हिन्दू धर्म का सबसे लिखित प्रमाण वैदिक काल (1500–500 ईसा पूर्व) से मिलता है। वैदिक काल में सबसे प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद की रचना तकरीबन 1500 से 1200 ईसा पूर्व (आज से करीब 3,500 साल पहले) हुई थी।
ऋग्वेद (Rig Veda) हिन्दू धर्म का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह आज भी इस्तेमाल किए जाने वाले सबसे पुराने धार्मिक ग्रंथों में से एक है। ऋग्वेद सहित सामवेद, यजुर्वेद तथा अथर्ववेद की रचना संस्कृत में हुई है, जिनमें देवी-देवताओं, पौराणिक कथाओं, संगीत स्तुति और यज्ञ-अनुष्ठानों (जिनमें बलि भी शामिल है) के साथ-साथ आयुर्वेद और चिकित्सा का भी उल्लेख मिलता है।
हिंदू धर्म की विचारधाराएं वैदिक ग्रन्थों के आधार पर ही विकसित होती रहीं। वेदों के अंत में उपनिषदों की रचना हुई। उपनिषद को ‘वेदांत’ भी कहा जाता है अर्थात वेदों का अंतिम भाग। उपनिषदों की रचना गुरु और शिष्य के बीच संवाद के रूप में की गई थी।
उपनिषदों में संसार को जन्म और पुनर्जन्म का कभी न खत्म होने वाला चक्र तथा कर्म को अच्छे-बुरे जीवन का आधार बताया गया है। उपनिषदों के पश्चात रामायण, महाभारत और पुराण जैसे धर्मग्रन्थों का उदय हुआ। ऐसे में वैदिक काल के आधार पर इतिहासविद् हिन्दू धर्म को कम से कम 3,500 साल पुराना बताते हैं। जबकि सिन्धु घाटी सभ्यता के अनुसार, हिन्दू धर्म तकरीबन 5000 से 6000 वर्ष पुराना है।
परन्तु कुछ ऐसे भी तथ्य हैं जो इतिहासवेत्ताओं के पसीने छुड़ा देते हैं। बतौर उदाहरण - साल 2019 में ईराक में भगवान श्रीराम के 6000 वर्ष पुराने भित्तिचित्र मिले हैं, साथ ही कल्प विग्रह नामक एक शिव प्रतिमा भी मिली है जिसकी कार्बन डेटिंग आयु 28,450 वर्ष आंकी जा चुकी है। ये सभी प्रमाण हिन्दू धर्म को कहीं अधिक प्राचीन बनाते हैं। ऐसे में किसी एक स्रोत के आधार हिन्दू धर्म की उत्पत्ति का सटीक अनुमान लगाना बेहद दुष्कर कार्य है।
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