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Lockdown possible in India if Strait of Hormuz is completely closed!

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पूर्णतया बन्द होने पर भारत में लॉकडाउन सम्भव!

ईरान के विरूद्ध अमेरिका-इजरायल के संयुक्त आक्रमण से पहले दुनिया के बहुत कम लोग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) की वैश्विक महत्ता से परिचित थे। हांलाकि आज की तारीख में तकरीबन हर शख्स की जुबां पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का नाम सुनने को मिल रहा है। इसमें कोई दोराय नहीं है कि इतिहास में कभी रेशम मार्ग की महत्ता थी किन्तु अब उसकी जगह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ने ली है।

ईरान की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जाड़ने वाला रास्ता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वास्तव में वैश्विक ऊर्जा व्यापार की रीढ़ है। हैरानी की बात है कि भारत अपने कुल कच्चे तेल का तकरीबन 80 फीसदी और गैस का 50 फीसदी हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। फिलहाल ईरान ने भारतीय जहाजों को कुछ छूट दे रखी है। बावजूद इसके सवाल यह उठता है कि यदि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूर्णतया बंद कर दे तो भारत को किस स्थिति का सामना करना पड़ सकता है? इस संवदेनशील प्रश्न का उत्तर जानने के लिए यह रोचक स्टोरी जरूर पढ़ें।  

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की महत्ता : भारत के सन्दर्भ में

प्राचीन काल में रेशम मार्ग की महत्ता थी, जिसके जरिए विभिन्न व्यापारिक वस्तुएं जैसे - रेशम, चीनी मिट्टी के बर्तन, हाथीदांत, कपड़े, मसाला आदि पश्चिमी देशों तक पहुंचते थे किन्तु आज की तारीख में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक ऐसा वैश्विक गलियारा है जिसके जरिए दुनिया के तेल व्यापार का तकरीबन 39 फीसदी और गैस आपूर्ति (एलएनजी) का 20 फीसदी हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।

'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को भौगोलिक भाषा में होर्मुज जलडमरूमध्य भी कहा जाता है। ईरान और ओमान के बीच स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तकरीबन 33 किलोमीटर चौड़ा समुद्री मार्ग है, जो उत्तर दिशा में ईरान फारस की खाड़ी, दक्षिण की तरफ ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है।

इस संकरे समुद्री मार्ग में सिर्फ 3-3 किमी. चौड़ा जलमार्ग तेल टैंकरों के शिपिंग लेन निर्धारित है। ध्यान रहे ईरान, इराक, कुवैत, सऊदी अरब, कतर, बहरीन और यूएई से निकलने वाले कच्चे तेल और गैस आपूर्ति के विशाल टैंकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ही होकर गुजरते हैं।

यदि भारत की बात करें तो 70 फीसदी तेल आपूर्ति और 50 फीसदी गैस आपूर्ति का एकमात्र रास्ता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ही है। ऐसे में यह अर्न्तराष्ट्रीय जलमार्ग भारत के लिए रीढ़ की ह​ड्डी के समान है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बन्द होते ही भारत में क्या होगा

भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट में है, होर्मुज बंद होने से तेल की मार और बढ़ चुकी है जिसके चलते वहां 'लॉकडाउन' जैसी स्थिति बन चुकी है। पाकिस्तान में स्कूल बंद और ऑफिसों में वर्क-फ्रॉम-होम लागू करने पर विचार किया जा रहा है। वहीं बांग्लादेश में भी फ्यूल राशनिंग शुरू हो चुकी है।

वहीं दूसरी तरफ भारतीय अर्थव्यवस्था में कच्चे तेल और गैस आपूर्ति के माध्यम से ही ऊर्जा, परिवहन, औद्योगिक उत्पादन, रसायन, प्लास्टिक और उर्वरक उद्योग जैसे प्रमुख क्षेत्रों को गति मिलती है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से अधिक कच्चा तेल रूस (तकरीबन 35-38 फीसदी), इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), अमेरिका, कुवैत, नाइजीरिया, मेक्सिको, ब्राजील और अंगोला जैसे देशों से आयात करता है। जाहिर है, होर्मुज के बन्द होते ही तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी जिससे ट्रांसपोर्ट, उड़ानें, खेती आदि सब महंगा हो जाएगा। इतना ही नहीं, सरकार धीरे-धीरे राशनिंग और स्पीड भी लिमिट कर देगी।

देश में एलपीजी की घरेलू उपयोग के अतिरिक्त होटल, रिसॉर्ट व्यवसाय और परिवहन उद्योग में विशेष भूमिका है। चूंकि भारत गैस (एलपीजी व एलएनजी) का 50 फीसदी हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। ऐसे में होर्मुज के बन्द होते ही देश का तकरीबन आधा खाद्य बाजार एवं परिवहन संचालन बन्द हो जाएगा।

बतौर उदाहरण - ईरान युद्ध के बाद से सूरत का टेक्सटाइल उद्योग (कपड़ा मिलें) और प्रोसेसिंग इकाइयां बंद हो रही हैं। गैस की भारी किल्लत और ऊँचे दामों के चलते कई अन्य कारखाने बंद (shutdown) होने की कगार पर हैं, जिससे हज़ारों प्रवासी मज़दूरों का पलायन शुरू हो गया है। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यदि ईरान और अमेरिका युद्ध ज्यादा दिनों तक खींचा तो गुजरात के मोरबी की सैकड़ों फैक्ट्रियां बंद करनी पड़ेंगी।

इतना ही नहीं, भारत बड़े पैमाने पर खाड़ी देशों को चीनी, चावल, गेहूं, आलू, प्याज और दूसरी सब्जियां, फल और जानवरों का चारा निर्यात करता है। इनमें सिर्फ ईरान को ही भारत 10 लाख टन चावल निर्यात करता है। ऐसे में होर्मुज के बन्द होने पर न केवल चावल के व्यापार पर असर पड़ेगा बल्कि गेहूं, आलू, प्याज, दूसरी सब्जियां और फल आदि के दाम बहुत गिर जाएंगे जिसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर देखने को मिलेगा।

उपरोक्त परिस्थितियों में दुनियाभर की अन्य सरकारों की तरह भारत सरकार भी एनर्जी सिक्योरिटी के लिए कहेगी। एनर्जी सिक्योरिटी के तहत यह सुनने को मिल सकता है, जैसे - बेवजह यात्रा कम करें। केवल जरूरी काम के लिए बाहर निकलें। गैस चूल्हे की जगह इलेक्ट्रिक चूल्हे का इस्तेमाल करें। जहां तक सम्भव हो घर से ही काम करें। यह एक प्रकार से अघोषित लॉकडाउन की तरह होगा।

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