ऊर्जा संकट को लेकर पीएम मोदी के हालिया बयान, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा जारी मुख्य निर्देश व अन्य राज्यों के मंत्रियों व आला अधिकारियों के वाहन काफिलों में बड़ी कटौती के अतिरिक्त कोटक महिन्द्रा बैंक के संस्थापक उदय कोटक ने देश के आर्थिक हालात को लेकर जो चेतावनी दी है, उससे साबित होता है कि भारत अब एनर्जी लॉकडाउन के बिल्कुल करीब पहुंच चुका है।
केप्लर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पास सिर्फ 18 दिनों का तेल भंडार है जबकि केन्द्र सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय खपत के हिसाब से भारत के पास अभी 60 दिनों का तेल भंडार मौजूद है। वहीं, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत के पास फिलहाल केवल 9.5 दिनों की जरूरत के बराबर ही रणनीतिक तेल भंडार मौजूद है।
अब आप का यह सोचना लाजिमी है कि यदि भारत में एनर्जी लॉकडाउन लगा तो आमजन को किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में इस संवदेनशील प्रश्न का उत्तर जानने के लिए ‘एनर्जी लॉकडाउन’ से जुड़ी यह रोचक स्टोरी जरूर पढ़ें।
एनर्जी लॉकडाउन से जुड़े हालिया संकेत
1. नरेन्द्र मोदी - नीदरलैड्स के द हेग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय समुदाय को सम्बोधित करते हुए कहा कि “पहले कोरोना आया, फिर युद्ध होने शुरू हो गए और अब ऊर्जा संकट है। अगर यह स्थिति जल्द नहीं बदली, तो सब कुछ खत्म हो सकता है। दुनिया की आबादी का एक बड़ा हिस्सा फिर से गरीबी के जाल में फंस सकता है।”
2. योगी आदित्यनाथ - पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा चंद दिनों पहले आम जनता तथा सरकारी अधिकारियों से ऊर्जा संरक्षण की अपील के बाद देश के सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ईंधन और बिजली की भारी बचत करने के मुख्य निर्देश जारी किए हैं- जिनमें सरकारी काफिलों में 50 फीसदी की कटौती, सरकारी कार्यालयों में बिजली की फिजूलखर्ची पर रोक, मंत्रियों व अधिकारियों को सरकारी वाहनों का इस्तेमाल सीमित करने का आदेश मिला है। इसके साथ ही जनता से बिजली और ईंधन का दुरुपयोग नहीं करने व सप्ताह में एक दिन 'नो व्हीकल डे' मनाने की अपील की गई है।
3. मुख्यमंत्री मोहन यादव- पीएम मोदी द्वारा ऊर्जा संरक्षण की अपील के बाद मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी अपने आधिकारिक काफिले में वाहनों की संख्या 13 से घटाकर 8 कर दी है। इसके साथ ही सभी मंत्रियों को अपने काफिले में कम से कम वाहनों के उपयोग के निर्देश दिए हैं।
इतना ही नहीं, प्रशासनिक अधिकारियों और आम जनता से निजी वाहनों का उपयोग नहीं करने की अपील की गई है। राज्य में ऊर्जा संकट से निपटने के लिए सौर ऊर्जा के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है।
4. उदय कोटक (संस्थापक, कोटक महिन्द्रा बैंक) - अभी हाल में ही CII Annual Business Summit 2026 में कोटक महिन्द्रा बैंक के संस्थापक और निदेशक उदय कोटक द्वारा दिया गया बयान लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। उदय कोटक ने अपने बयान में कहा कि “सबसे बुरे हालात के लिए तैयार रहें।” ईरान-अमेरिका और पश्चिम एशिया (Middle East) के टकराव के कारण दुनिया एक बहुत बड़े ऊर्जा संकट की तरफ बढ़ रही है, जिसका सीधा आम जनता और मध्यमवर्गीय परिवारों की जेब पर पड़ने वाला है।
5. डॉ. सज्जिद चिनॉय (भारतीय अर्थशास्त्री)- जेपी मॉर्गन के मुख्य भारतीय अर्थशास्त्री डॉ. सज्जिद चिनॉय का कहना है कि भारतीय इंडस्ट्री के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा ‘ऑयल शॉक’ है।
5. क्रिस गोपालकृष्णन (इंफोसिस सह-संस्थापक)- इंफोसिस के सह-संस्थापक क्रिस गोपालकृष्णन ने भी प्रधानमंत्री मोदी के ऊर्जा संरक्षण तथा अपव्यय कम करने की अपील का पुरजोर समर्थन किया है।
भारत में ‘एनर्जी लॉकडाउन’ की मजबूत स्थिति
- कितना बचा है तेल भंडार
केप्लर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पास सिर्फ 18 दिनों का तेल भंडार है जबकि केन्द्र सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय खपत के हिसाब से भारत के पास अभी 60 दिनों का तेल भंडार मौजूद है। वहीं, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत के पास फिलहाल केवल 9.5 दिनों की जरूरत के बराबर ही रणनीतिक तेल भंडार मौजूद है। जबकि एलपीजी/एलएनजी भंडार भी अधिकतम कुछ सप्ताह के लिए ही उपलब्ध है। बतौर उदाहरण- घरेलू एलपीजी की कमी के चलते देश के कुछ इलाकों में गैस सिलेंडर ब्लैक मार्केट में बहुत ऊँचे दामों पर बेचे जा रहे हैं।
- ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी
तकरीबन चार साल बाद भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े हैं। अभी हाल में ही केंद्र सरकार ने देशभर में पेट्रोल -डीजल की कीमतों में तीन रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। ऐसे में देश के अलग-अलग शहरों में पेट्रोल 103 रुपए 80 पैसे तथा डीजल 95 रुपए 25 पैसे प्रति लीटर के हिसाब से बिक रहा है। आशंका है, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आगे भी भारी बढ़ोतरी की जा सकती है। जानकारी के लिए बता दें कि दिल्ली-एनसीआर में 48 घंटे के भीतर सीएनजी की कीमतों में दो बार बढ़ोतरी की जा चुकी है। लिहाजा दिल्ली में सीएनजी के दाम पहली बार 80 रुपए के पार चले गए हैं।
- बन्द होते उद्योग धन्धे
गुजरात के मोरबी में 170 कारखाने बंद हो चुके हैं जिससे तकरीबन एक लाख मजदूर प्रभावित हुए। वहीं सूरत का मशहूर कपड़ा उद्योग इतिहास के सबसे भीषण संकटों के दौर से गुजर रहा हैं। बीते 60 दिनों में टेक्सटाइल्स इंडस्ट्री को लगभग ₹3000 करोड़ का अनुमानित नुकसान हुआ है।
ठीक यही हाल, मुम्बई में भी है, इस शहर के 20 फीसदी होटल और रेस्तरां बंद हो चुके हैं। अब आप अनुमान लगा सकते हैं, देश के अन्य शहरों की स्थिति क्या होगी।
- परिवहन व्यवधान
देश की कई एयरलाइनों ने अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में 25 फीसदी तक की कटौती की है। जबकि त्यौहारी सीजन और भारी मांग के चलते हवाई किराए में 300 फीसदी तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सख्त चिंता जताई है। जबकि सीएनजी की कमी के कारण देश के प्रमुख शहरों में ऑटो-रिक्शा की उपलब्धता 30 फीसदी तक घट गई है।
- भारतीय रुपए की रिकॉर्ड गिरावट
देश में ऊर्जा संकट का लक्षण दिखना शुरू हो चुका है, इतिहास में पहली बार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 96 के स्तर पर पहुंच चुका है। भारतीय रुपये की इस रिकॉर्ड गिरावट (लगभग ₹95-₹96 प्रति डॉलर) ने बाजार से लेकर आम लोगों तक की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक दबाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेश में कमी की वजह भारतीय रुपया इतना कमजोर हुआ है।
- उर्वरक एवं कृषि पर प्रभाव
देश के उर्वरक संयंत्रों को ज़रूरत के हिसाब से गैस आपूर्ति का केवल 70 फीसदी ही मिल पा रहा है, जाहिर है उर्वरक उत्पादन में कमी होगी। जिसका सीधा असर फसलों के उत्पादन पर पड़ेगा। फिर क्या है, पैदावार कम होने से खाद्य कीमतों का बढ़ना बिल्कुल तय है।
यह सौ फीसदी सच है कि भारत सरकार ने अभी तक एनर्जी लॉकडाउन की घोषणा नहीं की है। किन्तु आधिकारिक तौर पर लॉकडाउन न होने के बावजूद भी ऊर्जा संकट का स्पष्ट प्रभाव जमीनी स्तर पर खुलकर देखने को मिल रहा है। ऐसे में उपरोक्त तथ्यों के आधार पर आप अन्दाजा लगा सकते हैं कि हमारा देश एनर्जी लॉकडाउन के कितना करीब पहुंच चुका है।
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