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Guru Nanak Dev and Sant Kabir actually meet, Find out the truth.

गुरु नानक देव से संत कबीर की मुलाकात, जानें क्या है सच?

भारतीय इतिहास में गुरु नानक देव और संत कबीर के बीच हुई मुलाकात की अक्सर चर्चा होती रहती है। पवित्र ग्रन्थ कबीर सागर के अनुसार, कबीर दास ने गुरु नानक देव को सतलोक का दर्शन कराया और दिव्य ज्ञान प्रदान किया था। वहीं, कबीर पंथियों का यह भी मानना है कि श्री नानक देव के गुरु थे कबीर दास जी।

हांलाकि सिखों के पवित्र धर्मग्रन्थ गुरु ग्रन्थ साहिब में कहीं भी इस बात का प्रमाण नहीं मिलता कि श्री नानक देव के गुरु कबीर दास जी थे। चूंकि गुरु ग्रन्थ साहिब में संत कबीर दास की तकरीबन चार हजार वाणी समाहित की गई है, ऐसे में यह कहना बिल्कुल लाजिमी है कि गुरु नानक जी ने संत कबीर की आध्यात्मिक शिक्षाओं और संत महिमा को पूर्ण रूप से स्वीकार किया है।

अब आप सोच रहे होंगे कि संत कबीर और गुरु नानक देव की मुलाकात कहां हुई थी? आपके मस्तिष्क में एक प्रश्न यह भी उठ रहा होगा कि संत कबीर और गुरु नानक देव की उम्र में कितना फासला रहा होगा? ऐसे में संत कबीर और गुरु नानक देव के बीच हुई मुलाकात का पूरा सच जानने के लिए यह रोचक स्टोरी जरूर पढ़ें।

गुरु नानक देव से उम्र में कितने बड़े थे संत कबीर

ईश्वर के निराकार स्वरूप के उपासक संत कबीर की जन्म एवं जाति के सम्बन्ध में निश्चयपूर्वक कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। यद्यपि संत कबीर को सुल्तान सिकन्दर लोदी का समकालीन माना जाता है। वैसे तो ज्यादातर इतिहासकारों ने संत कबीर को तकरीबन 15वीं शताब्दी में ही रखा है, किन्तु सटीक जन्मतिथि के सम्बन्ध में अभी भी मतभेद है।

कुछ विद्वानों के अनुसार, कबीर दास का जन्म 1398 ई. में हुआ और साल 1518 में उन्होंने परलोक गमन किया था। वहीं हिन्दी पाठ्य पुस्तकों में कबीर दास की जीवन अवधि 1440 से 1510 ई. की बीच बताई गई है। दक्षिण एशियाई इतिहास के चर्चित लेखक डेविड लॉरेनज ने लिखा है कि कबीर तकरीबन 1450 और 1520 ईस्वी के बीच बनारस में रहते थे। कबीर पर बहुत कुछ लिखने वाले विद्वान लिंडा हेस ने कबीर को 1398 से 1518 ई. के बीच रखा है।

वहीं, सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी का जन्म लाहौर से 30 मील दूर तलवंडी (ननकाना साहिब) में कार्तिक पूर्णिमा को 1469 ई. में एक खत्री (क्षत्रिय) परिवार में हुआ था। श्री गुरु नानक देव का निधन 1539 ई. में करतारपुर में हुआ था। इतिहासकारों के मध्य गुरुनानक देव जी की जन्म​तिथि को लेकर तकरीबन एकरूपता दिखती है।

ऐसे में यदि हम संत कबीर दास और गुरुनानक देव जी की उम्र का​ विश्लेषण करें तो वे समकालीन थे और तकरीबन 50 वर्षों तक दोनों का समय एक साथ रहा। इन दोनों की जन्मतिथि में तकरीबन 40 से 70 साल का फासला दिखता है। कुल मिलाकर संत कबीर दास जी और श्री गुरुनानक देव जी की उम्र में अधेड़ और बालक जैसा अन्तर था।

गुरु नानक देव से संत कबीर की मुलाकात

श्री गुरु नानक देव जी ने अपने जीवनकाल में भारत के साथ ही अफगानिस्तान, फारस (ईरान) और अरब के मुख्य स्थानों का भ्रमण किया। उनकी इन आध्यात्मिक यात्राओं को उदासियां कहा जाता है। साल 1500 से 1506 के दौरान गुरु नानक देव जी ने बनारस की यात्रा की थी।

कबीरपंथी लहेना सिंह लिखते हैं कि साल 1506  में गुरु नानक देव जी जब काशी आए तब कबीर दास जी शहर में नहीं थे। गुरु नानक देव जी के लौटते समय पंचकोशी में कबीरदास जी से मुलाकात हुई, तब कबीर दास की उम्र 111 साल थी।

एक अन्य प्रसंग में यह मिलता है कि श्री गुरु नानक देव जी दिल्ली, कुरूक्षेत्र, मथुरा, अयोध्या, प्रयाग होते हुए साल 1501 में बनारस पहुंचे। गुरु नानक देव जी बनारस में तकरीबन 15 दिनों तक रहे, इसके बाद वे कबीर दास जी से मिलने के लिए मगहर गए और जहां वे 7 दिनों तक रहे। इस प्रकार गुरु नानक देव जी और कबीर दास के विचारों का आदान-प्रदान हुआ।

उपरोक्त तथ्यों से इतर पवित्र ग्रन्थ कबीर सागर के पृष्ठ संख्या 158-159 के अनुसार, जीवित रूप धरयो तब भाई। हम पंजाब देश चलि आई।। अर्थात् कबीर दास जी स्वयं जीवित महात्मा का स्वरूप धारण कर पंजाब (अब पाकिस्तान में) में बेई नदी के किनारे मिले थे। तत्पश्चात कबीर दास जी ने नानक देव जी को सतलोक (सच्चखंड) के दर्शन कराए।

फिर आगे लिखा है - अनहद बानी कियौ बुलाय। सुनिकै नानक दरश निहारा।। अर्थात् संत कबीर अपनी दिव्य वाणी से नानक को पुकारते हैं, जिससे नानक देव जी को दर्शन प्राप्त होता है। अगली पंक्ति में उद्धृत है - सुनिके अमर लोकी वाण। जानि परा निज समरथ ज्ञानी।। अर्थात - संत कबीर के अमर ज्ञान को सुनकर श्री गुरु नानक को कबीर की दिव्य शक्ति और सर्वज्ञता का एहसास होता है।

यही नहीं, पवित्र ग्रन्थ कबीर सागर में गुरु नानक जी को कबीर साहेब का शिष्य बताया गया है, जो उन्हें जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त कर सतनाम का ज्ञान देते हैं। हांलाकि सिखों के पवित्र धर्मग्रन्थ गुरु ग्रन्थ साहिब में कहीं भी ​ऐसा नहीं लिखा है कि श्री गुरु नानक जी के गुरु संत कबीर दास थे। हां, यह सच है कि इस मुलाकात के बाद गुरु नानक जी ने कबीर जी को परमेश्वर के रूप में मान्यता दी, जिसका वर्णन गुरु ग्रंथ साहिब में किया गया है।

कबीर दास और गुरु नानक देव जी की मुलाकात का सच

पवित्र ग्रन्थ कबीर सागरव कबीर पंथी साहित्य के अतिरिक्त अन्य धार्मिक साक्ष्यों में संत कबीर महात्मा रूप धारण करके पंजाब में बेई नदी के किनारे मिले थे। जबकि अन्य प्रसंगों में श्री गुरु नानक देव जी ने साल 1500 से 1506 ई. में अपनी पहली उदासी में काशी की यात्रा की थी, इस दौरान वह कबीर से मिले थे।

श्री गुरु नानक देव की काशी यात्रा के सम्बन्ध में कोई लिखता है कि वे कबीर दास से पंचकोशी में मिले थे, तो कोई लिखता है कि मगहर में। चूंकि इन दोनों विभूतियों के जीवनकाल में 40-70 वर्षों का अंतराल दिखता है, जो उनके मुलाकात को सम्भव बनाता है।

निष्कर्षत: स्थान चाहे जो भी रहा हो, किन्तु विभिन्न प्रसंगों से ऐसा प्रतीत होता है कि कबीर दास और श्री गुरु नानक देव की मुलाकात अवश्य हुई थी। इतना अवश्य है कि श्री गुरु नानक देव से मुलाकात के दौरान कबीर दास जी वयोवृद्ध रहे होंगे।

कबीर दास और गुरु नानक देव जी की वैचारिक समानता

1. ईश्वर निराकार है।

2. जात-पात, मूर्ति पूजा तथा बाह्य आडम्बर का विरोध।

3. आध्यात्मिक मार्ग दर्शन के लिए गुरु की अनिवार्यता पर जोर।

4. हिन्दू-मुस्लिम एकता के पक्षपाती।

5. मानव मात्र की एकता एवं साम्यवादी विचारधारा के पोषक।

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