दुनिया के इतिहास में हिममानव येति आज भी एक रहस्य बना हुआ है। हांलाकि भारत में येति का उल्लेख हजारों से पूर्व सबसे प्राचीन धर्मग्रन्थों ऋग्वेद तथा सामवेद के अतिरिक्त पुराणों, रामायण तथा महाभारत नामक महाकाव्य में भी मिलता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार येति भगवान शिव के उग्र और शक्तिशाली गण है जिन्हें खुद महादेव ने कैलाश की रक्षा के लिए नियुक्त किया था। सामान्यतया हिंदी में 'यति' का अर्थ इंद्रियों को वश में करने वाला या तपस्वी होता है।
यूरोपीय देशों से इतर भारत, भूटान, नेपाल और तिब्बत की संस्कृति में येति का इतिहास शुरू से ही चर्चा में रहा है। नेशनल जिऑग्राफिक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 326 ईसा पूर्व में सिकंदर ने सिंधु घाटी जीतने के बाद हिममानव येति को देखने की इच्छा जताई थी।
नेपालियों के मुताबिक, यदि येति के सामने आप आ गए तो आपके बचने की कोई उम्मीद नहीं है, वह सामने वाले को एक ही मुक्के परलोक भेज सकता है। हैरानी की बात है कि येति रात के वक्त ही ज्यादा सक्रिय रहता है।
दोस्तों! जाहिर है, आपके मन में भी येति के बारे में जानने की इच्छा जाग चुकी होगी, ऐसे में रहस्यमयी हिममानव येति से जुड़ी इस रोचक स्टोरी को जरूर पढ़ें।
- हिन्दू धर्मग्रन्थों वेदों, पुराणों, रामायण तथा महाभारत में हिममानव येति के होने का उल्लेख मिलता है।
- ऋग्वेद तथा सामवेद में हिममानव येति का उल्लेख किया गया है।
- हिमालय की तराई तथा नेपाल के कुछ इलाकों में राम-सीता से जुड़ी प्रचलित लोक कथाओं में येति का उल्लेख किया गया है।
- पौराणिक कथाओं के अनुसार येति भगवान शिव के उग्र और शक्तिशाली गण है जिन्हें खुद महादेव ने कैलाश की रक्षा के लिए नियुक्त किया था।
- नेपाल की 12 लोककथाओं में येति को बेहद खतरनाक बताया गया है।
- तिब्बती बौद्ध धर्म में येति को अपनाया गया, जहाँ इसे एक अमानवीय प्राणी (तिराग्योनी) माना जाता है, जो कभी-कभी धर्म का भी पालन कर सकता है।
- हिमालय रहस्यमयी प्राणी येति को भारत में हिममानव, तिब्बत में मेह-तेह, नेपाल में यति, उत्तरी अमेरिका में बिगफुट, ब्राजील में मपिंगुरे, ऑस्ट्रेलिया में योवेई, इंडोनेशिया में साजारंग गीगी आदि नामों से पुकारा जाता है।
- नेपाली लोग येति को ‘कांगचेंजुन्गा राचीस’ अर्थात कंचनजंघा का दानव भी कहते हैं।
- भारत की सबसे ऊंची चोटी कंचनजंघा पर जिसने भी चढ़ने की कोशिश की वो या तो मारा गया अथवा चढ़ नहीं सका। मान्यताएं कहती हैं कि इस पहाड़ पर येति नामक भयावह जीव रहता है।
- नेशनल जिऑग्राफिक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 326 ईसा पूर्व में सिकंदर ने सिंधु घाटी जीतने के बाद हिममानव येति को देखने की इच्छा जताई थी।
- लद्दाख के कुछ बौद्ध मठों ने दावा किया था कि हिममानव येति को उन्होंने देखा है।
- आधुनिक इतिहास में येति का सबसे पहला उल्लेख एक पर्वतारोही बी.एच. होजसन ने किया था।
- साल 1832 में जेम्स प्रिन्सेप के ‘जर्नल ऑफ़ द एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बंगाल’ ने पर्वतारोही बी.एच. हॉजसन के उत्तरी नेपाल के विवरण को कुछ इस प्रकार लिखा - “स्थानीय पथप्रदर्शकों ने एक लम्बे, दो पैरों वाले प्राणी को देखा जो लम्बे काले बालों से ढंका था जो डर से भागता हुआ प्रतीत हुआ।”
- रॉयल जिओग्राफिकल सोसायटी के सदस्य एम.ए. टोमबाजी ने साल 1925 में कंचन जंघा पर्वत माला के पास बालों से ढ़के एक विशालकाय प्राणी देखने का दावा किया था।
- दिसंबर 1951 में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने का प्रयास करते समय एरिक शिप्टन ने बर्फ में अनगिनत बड़े-बड़े पदचिह्नों की तस्वीरें ली जिसकी तस्वीर वायरल हो चुकी है।
- ब्रिटिश पर्वतारोही डॉन ह्विलंस ने 1970 में अन्नपूर्णा पर चढ़ते समय येति को देखने का दावा किया। डॉन ह्विलंस के अनुसार, उस शाम उसने दूरबीन से 20 मिनट तक एक दो पैरों वाले वानर जैसे दिखने वाले प्राणी को देखा।
- ब्रिटिश पर्वतारोही रीनहोल्ड मेसनर ने 1980 के दशक में हिमालय की गोद में येति को देखने का दावा किया।
- अमेरिकन टीवी एंकर जोशुआ गेट्स और उनकी टीम ने दिसम्बर 2007 में येति के पदचिह्न देखने का दावा किया। यति के प्रत्येक पदचिह्न की लंबाई 33 से.मी. थी।
- साल 2011 में रूस के पर्वतारोहियों के एक दल ने येति के होने के पक्के सबूत जुटाने का दावा किया था।
- भारतीय सेना माउटाइरिंग एक्सपेडिशन टीम ने सर्वप्रथम 09 अप्रैल, 2019 को मकालू बेस कैंप के पास 32/15 इंच साइज़ के हिममानव 'येति' के रहस्यमयी पैरों के निशान लिए हैं। भारतीय सेना ने ट्विटर हैंडल पर इसकी कुछ तस्वीरें भी जारी की।
- ज्यादातर वैज्ञानिक दावा करते हैं कि हिमालय पर मिले ये निशान बर्फीले भालूओं के हैं। किन्तु पैरों के निशान कभी भी चार पैरों वाले जानवर के नहीं हो सकते। इसलिए यह रहस्य आज तक अनसुलझा है।
- कुछ प्रमुख चर्चित फिल्मों में भी येति की उपस्थिति को अनिवार्य रूप से दिखाया गया है जैसे - द स्नो क्रिएचर (1954), द अबोमिनेबल स्नोमैन (1957), मॉन्स्टर्स, इंक(2001), द मम्मी - टॉम्ब आफ द ड्रैगन एम्परर और भारतीय फिल्म ‘अजूबा कुदरत का' (1991) में यति की कहानी दिखाई गई है।
- बन्दर और भालू के संयुक्त रूप जैसा दिखने वाला विशालकाय हिममानव येति एक औसत मानव की तुलना में ज्यादा लंबा होता है और इसका वजन तकरीबन 100-180 किलोग्राम माना जाता है।
- नेपालियों के मुताबिक, यदि येति के सामने आप आ गए तो आपके बचने की कोई उम्मीद नहीं है, वह एक ही मुक्के से जान ले सकता है। हैरानी की बात है कि येति रात के वक्त ही ज्यादा सक्रिय रहता है।
- विश्व के कई पर्वतारोहियों और हिमयात्रियों द्वारा येति को देखने का दावा बार-बार किया जाता रहा है किन्तु सच यह है कि इसके पुख्ता सबूत कभी नहीं मिले।
निष्कर्षत: यदि हम वैज्ञानिक सोच की बात करें तो हिमालय क्षेत्र की दुर्गम परिस्थितियों में किसी मनुष्य के लिए जीवित रहना तकरीबन असम्भव है। दरअसल हिमालय में भोजन का जुगाड़ करना इतना आसान नहीं है, सम्भव है यदि कोई कुछ समय के लिए भोजन जुटा भी ले तो भी उसे कुछ दिनों पश्चात भोजन की तलाश में बाहर निकलना ही पड़ेगा। ऐसे में हिममानव येति का इतिहास कितना सच है, यह अभी भविष्य के गर्त में है।
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