श्रावण (सावन) मास की पूर्णिमा के दिन रक्षाबन्धन का पवित्र त्यौहार मनाया जाता है। इस पावन पर्व पर बहन अपने भाई को तिलक लगाकर ‘रक्षा’ (रेशम का कच्चा धागा) बांधती है जिसे आम भाषा में ‘राखी’ कहा जाता है। सामान्यतः बहनें ही भाइयों को राखी बाँधती हैं, किन्तु कुछ सम्मानित सम्बन्धियों जैसे- पुत्री द्वारा पिता को भी राखी बांधी जाती है।
क्या आप जानते हैं, रक्षाबंधन के दिन राजपूताना (राजस्थान) में बहन अपनी भाभी को भी राखी बांधती है जिसे ‘लुम्बा राखी’ कहा जाता है। अब आपका सोचना लाजिमी है कि बहन अपने भाई के साथ-साथ भाभी को भी राखी क्यों बांधती है? इतना ही नहीं, आखिर में भाभी की कलाई में बांधी जाने वाली लुम्बा राखी का इतिहास कितना पुराना है? इन सभी प्रश्नों का उत्तर जानने के लिए रक्षाबन्धन से जुड़ी यह रोचक स्टोरी जरूर पढ़ें।
लुम्बा राखी
रक्षाबंधन के दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है, इसके बाद वह अपनी भाभी को भी राखी बांधती है, जिसे ‘लुम्बा राखी’ कहा जाता है। लुम्बा राखी बांधने की अनोखी शुरूआत राजपूताना (अब राजस्थान) के मारवाड़ क्षेत्र से हुई। दरअसल मारवाड़ी भाषा में लुम्बा का शब्दिक अर्थ - ‘चूड़ी’ होता है। 'लुंबा राखी' को सामान्य राखियों की तरह कलाई पर नहीं अपितु बहन अपनी भाभी की चूड़ी अथवा कंगन (ब्रेसलेट) में बांधती है। चूड़ी अथवा कंगन से नीचे की तरफ लटकती हुई लुम्बा राखी बेहद खूबसूरत लगती है।

लुम्बा राखी का इतिहास
लुम्बा राखी के इतिहास की कोई निश्चित तिथि नहीं है लेकिन सांस्कृतिक अध्ययनों तथा लोक स्मृतियों के मुताबिक, इसका विकास मध्यकालीन मारवाड़ के महाजन समाज में हुआ। उस दौर में पुरुष व्यापारी जब दूर-दराज के क्षेत्रों में व्यापार करने के लिए जाते थे, तब घर और कारोबार की समस्त जिम्मेदारियां गृह लक्ष्मीयां ही सम्भालती थीं।
इस वजह से उस घर की बहन ने अपनी शुभकामनाओं में भाई की तरह भाभी को समान स्थान दिया। हांलाकि लुंबा राखी बांधने की परंपरा देश के हर हिस्से में एक जैसी नहीं है। यह कुछ समुदायों और परिवारों में ज्यादा प्रचलित है। बतौर उदाहरण - बिहार के आरा क्षेत्र में मारवाड़ी, राजस्थानी, जैन और पंजाबी परिवारों में काफी लम्बे समय से लुम्बा राखी बांधने का रिवाज चला आ रहा है। बावजूद इसके ‘लुम्बा राखी’ वर्तमान में राजस्थान की सीमाएं पाकर पूरे देश में लोकप्रिय हो चुकी है।
लुम्बा राखी का सांस्कृतिक महत्व
सनातन धर्म में रक्षाबंधन का पर्व पुरातन काल से चला आ रहा है। रेशम के कच्चे धागों से बने रक्षा को बहन अपने भाई की कलाई में अपनी रक्षा के आग्रह एवं संकल्प के साथ बांधती है। वैसे तो रक्षाबंधन का त्यौहार भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है किन्तु राजस्थान सहित देश के कई हिस्सों में बहनें अपने भाई के साथ-साथ भाभी को एक विशेष राखी बांधती हैं जिसे हम सभी ‘लुम्बा राखी’ के नाम से जानते हैं।
मान्यता है कि रक्षाबन्धन के पर्व पर बहन अपने भाई से रक्षा का वचन लेती है, चूंकि इस अनूठे वचन को निभाने में भाई के साथ-साथ भाभी की भी महती भूमिका होती है, इसलिए ‘लुम्बा राखी’ का खासा महत्व बढ़ जाता है।
भाभी की चूड़ी अथवा कंगन में बांधी जाने वाली 'लुंबा राखी' रिश्तों में प्रेम की प्रतीक मानी जाती है। यह सच है कि भाई का सुख-सौभाग्य उसकी पत्नी से जुड़ा होता है। ऐसे में बहनें अपने भाई साथ-साथ भाभी की मंगलकामना के लिए लुम्बा राखी बांधती हैं।
हिन्दू समाज में पत्नी को ‘अर्धांगिनी’ कहा गया है, अर्थात पति की शक्ति का आधा हिस्सा पत्नी को प्राप्त है। अत: बहनें अपनी भाभी को लुम्बा राखी बांधकर यह संदेश देती हैं कि वह भी परिवार का सबसे अहम हिस्सा हैं। लुंबा राखी बांधने की रस्म से भाई और भाभी के रिश्ते और भी बेहतर होते हैं।
इस प्रकार लुम्बा राखी महिलाओं की वैवाहिक जिन्दगी में खुशी, सुरक्षा, बराबरी, अपनापन, दया, देखभाल तथा आत्मविश्वास बनाए रखने की प्रतीक है और रिश्तों को सुरक्षित बनाए रखती है। निष्कर्षत: लुंबा राखी न केवल पारिवारिक एकता को बढ़ावा देती है अपितु एक खुशहाल शादीशुदा ज़िंदगी में खुशियां भरने का काम करती है।

लुम्बा राखी की खासियत
भाभियों की चूड़ियों में बांधी जाने वाली लुम्बा राखी के बढ़ते ट्रेंड को देखते हुए आजकल इसे खास तरीके से तैयार किया जा रहा है। विशेषरूप से भाभी या बहन के पति के लिए तैयार की जाने वाली लुम्बा राखी बाजार में मिलने वाली दूसरी राखियों के मुकाबले काफी अलग होती है।
लुम्बा राखी में सजावटी धागा लगा होता है जिस पर कुंदन, स्टोन, गोटा-पट्टी और मोती की लटकन के साथ-साथ छोटी-छोटी सजावटी चीजें लगी होती है, जो इसकी सुन्दरता में चार चांद लगाती हैं। लुम्बा राखी को भाभी की चूड़ियों में बांधने के लिए ही डिजाइन किया गया होता है।
इससे इतर मॉर्डन भाभियां आजकल चेन या ब्रेसलेट स्टाइल लुंबा राखी कुछ ज्यादा पसन्द करती हैं। सुरक्षा, प्यार और पारिवारिक रिश्तों के जश्न का प्रतीक मानी जाने वाली लुम्बा राखी की कीमत बाजार में 50 रुपए से लेकर 5 हजार रुपए तक है।
